उन रोज़ों इतनी ग़फ़लत अच्छी नहीं इधर से — मीर तक़ी मीर

उन रोज़ों इतनी ग़फ़लत अच्छी नहीं इधर से अब इज़्तिराब हम को दो दो पहर रहे है

“Those fasts are not good enough heedlessness from here; now we are passing two quarters of an hour with restlessness.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उन रोज़ों से इतनी ग़फ़लत अच्छी नहीं कि इधर से भी, अब तो हम को दो-दो पहर से इज़्तिराब हो रहा है।

विस्तार

यह शेर उस बदलाव को बयान करता है, जब ज़िंदगी की ग़फ़लत खत्म हो जाती है और बेचैनी शुरू हो जाती है। शायर कह रहे हैं कि वह लापरवाह दिन अब नहीं गुज़र सकते। अब तो दिल में एक अजीब सा इज़्तिराब है, एक बेचैनी जो लगातार बनी रहती है। यह एक गहरे अहसास का दर्द है, जब सुकून की जगह चिंता ने ले ली है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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