आगह तो रहिए उस की तर्ज़-ए-रह-ओ-रविश से — मीर तक़ी मीर

आगह तो रहिए उस की तर्ज़-ए-रह-ओ-रविश से आने में उस के लेकिन किस को ख़बर रहे है

“Stay near to that style of devotion and passion, But who knows when they will arrive, or to whom?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उसकी भक्ति और प्रेम की शैली के पास बने रहना, लेकिन यह किसी को पता नहीं कि वह कब आएगा, या किसके लिए आएगा।

विस्तार

यह शेर आशिक़ के दिल की उलझन को बयान करता है। शायर कहते हैं कि महबूब के हर अंदाज़, हर नज़रे पर ध्यान देना ज़रूरी है.... लेकिन यह भी तो सच है कि उनका आना कब होगा, यह किसी को नहीं पता। यह सिर्फ़ प्रेम की अनिश्चितता को नहीं, बल्कि जीवन की उस सच्चाई को दिखाता है जहाँ हम सब इंतज़ार करते हैं, पर वक़्त किसी के हाथ में नहीं होता!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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