“Some one, in the garden of joy, must love someone, but I have remained in intoxication ever since I fell in love.”
कोई होगा जो आनंद और खुशियों के बाग में किसी को चाह करेगा, लेकिन मैं तो तब से ही मदहोशी में रहा जब से मुझे प्रेम हुआ।
यह शेर मोहब्बत के गहरे दर्द को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि कोई भी जो खुश और बेफ़िक्र होगा, वह किसी को चाहने वाला ज़रूर होगा। लेकिन शायर खुद कहते हैं कि जब से उन्हें इश्क़ हुआ है, उनकी ज़िंदगी बस ग़म और उदासी में गुज़र रही है। यह एक बहुत ही दर्दनाक एहसास है, कि प्यार इतना खूबसूरत होता है, पर साथ में यह एक गहरा ग़म भी लेकर आता है।
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