बख़्शिश ने मुझ को अब्र-ए-करम की किया ख़जिल
ऐ चश्म जोश-ए-अश्क-ए-नदामत को क्या हुआ
“The favor has brought me shame with its grace, O you whose eyes are the passion of tears, what has become of the tears of repentance?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बख्शीश ने मुझे अपनी कृपा के पर्दे से शर्मसार कर दिया, ऐ आँखों के जोश से भरे आँसू के सागर, पश्चाताप के आँसू का क्या हुआ?
विस्तार
यह शेर एक गहरे भावनात्मक विरोधाभास को बयान करता है। शायर कहते हैं कि बख्शीश, जो एक तरह का मेहरबान तोहफा है, उसने उन्हें शर्मिंदा कर दिया है। इसका मतलब है कि यह कृपा इतनी अजीब थी कि इसने उन्हें खुद पर संदेह करने पर मजबूर कर दिया। और दूसरी पंक्ति में, वह अपने आँसुओं के जोश के बारे में पूछते हैं—जैसे, मेरे अंदर का दर्द, मेरी तड़प.... कहीं खो गई है!
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