उम्मीद-वार-ए-वादा-ए-दीदार मर चले — मीर तक़ी मीर

उम्मीद-वार-ए-वादा-ए-दीदार मर चले आते ही आते यारो क़यामत को क्या हुआ

“The hope of the promised sight has died;\When you arrive, friends, what has happened to the Day of Judgment?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उम्मीदों और दीदार के वादों से भरे फूल मर गए; यारो, जब तुम आते हो, तो क्या हुआ क़यामत को?

विस्तार

यह शेर उम्मीद टूटने के दर्द को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब के दीदार का जो वादा था, और जिस उम्मीद पर हमने जीना शुरू किया था, वो अब मर चुकी है। दूसरी लाइन में 'क़यामत' का ज़िक्र करना... यह वक़्त की क्रूरता है! यह बताता है कि जीवन में निराशाएँ लगातार आती रहती हैं, एक के बाद एक... जैसे क़यामत का आना। मिर्ज़ा तक़ी मीर ने उम्मीद और वक़्त के इस गहरे रिश्ते को बहुत ही दर्दनाक अंदाज़ में पेश किया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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