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शब इस दिल-ए-गिरफ़्ता को वा कर ब-ज़ोर-ए-मय
बैठे थे शीरा-ख़ाने में हम कितने हर्ज़ा-कोश

O heart, captive, why do you make such a plea, When we were in the tavern, how many were distraught and weary?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे दिल, बंदी मन, बलपूर्वक मय के नशे से ऐसा क्यों कर रहे हो? हम तो शायरखाने में बैठे थे, कितने व्याकुल और परेशान थे।

विस्तार

यह शेर एक गहरी बेचैनी और भावनात्मक उथल-पुथल को दर्शाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर यहाँ कहते हैं कि उनका दिल, जो एक क़ैदी सा है, रात और मय (शराब) के ज़ोर से हिल रहा है। शायर किसी महफ़िल में बैठे हैं, लेकिन उनका मन इतनी चिंता में डूबा है कि वो महफ़िल के माहौल से बिल्कुल बेगाना है। यह सिर्फ़ शराब का असर नहीं, बल्कि दिल की अंदरूनी परेशानी है।

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