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जाता रहा निगाह से जूँ मौसम-ए-बहार
आज उस बग़ैर दाग़-ए-जिगर हैं सियाह-पोश

The season of spring, which left my gaze, was always beautiful; today, without the stain upon my heart, it is clad in black.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

नज़र से जैसे मौसम-ए-बहार बीत गया, आज उस पर दाग़-ए-जिगर के बिना वह काले वस्त्र में है।

विस्तार

ये शेर उस विरह की कहानी कहता है जो दिल को पूरी तरह डुबो देता है। शायर कह रहे हैं कि ज़िंदगी की बहार.... जो चीज़ें आँखों के सामने से गुज़र गईं, उन्हें वापस पाना मुमकिन नहीं। और आज.... उस बहार के बिना, दिल पर जो गम का दाग़ है, उसे काले रंग में कैसे बयां किया जाए! यह बस एक गहरा, दर्द भरा एहसास है।

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