जुज़ लाला उस के जाम से पाते नहीं निशाँ
है कोकनार उस की जगह अब सुबू ब-दोश
“From Lala's cup, no traces can be found, For Kokanar's place, now Subu B-Dosh is crowned.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जुज़ लाला के जाम में कोई निशान नहीं मिलता, और कोकनार की जगह अब सुबू ब-दोश बन गया है।
विस्तार
यह शेर बदलाव और यादों की नश्वरता पर एक गहरा विचार है। शायर कहते हैं कि महबूब की याद या उसका असर इतना गहरा है कि वह किसी निशान की तरह नहीं दिखता। यह तो बस एक एहसास है। और दूसरा मिसरा बताता है कि कोई भी खूबसूरत जगह हमेशा वैसी नहीं रहती; समय के साथ हर चीज़ बदल जाती है। यह ज़िंदगी के इस सच को बयां करता है कि कुछ चीज़ें बस यादों में ही ज़िंदा रहती हैं।
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