जिगर मुँह तक आते नहीं बोलते
ग़रज़ हम भी करते हैं क्या क्या गई
“The heart does not let its feelings speak out; Do we not also have our needs and desires?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मन के भाव मुँह तक आते नहीं, और हम भी अपनी ज़रूरतें और इच्छाएँ रखते हैं।
विस्तार
यह शेर उस एहसास को बयां करता है जब दिल में बहुत कुछ होता है, लेकिन उसे ज़ुबान पर लाना मुमकिन नहीं होता। शायर कहते हैं कि हमारे जिगर में इतनी बातें दबी हैं, इतनी आरज़ूएँ हैं कि वो मुँह तक आके बोल भी नहीं पातीं। यह उन तमाम अनकही बातों का इज़हार है, वो एहसास जो हम जी रहे हैं, पर कह नहीं पा रहे। यह एक गहरा तसव्वुर है.... अंदरूनी उलझन का!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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