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कहाँ का ग़ुबार-ए-आह दिल में ये था
मिरी ख़ाक बदली सी सब छा गई

From where did this dust of sighing reside in my heart, Like scattered ash, everything has become enveloped.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

दिल में यह आँसू-धूल कहाँ से आई, मेरी राख की तरह सब कुछ ढक गई।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी उदासी और बेचैनी को बयान करता है। शायर पूछते हैं कि यह 'ग़ुबार-ए-आह' (साँसों का धुँआ) कहाँ से आया? यह उदासी इतनी फैली हुई है कि यह पूरी ज़िंदगी पर, जैसे उनकी अपनी राख पर, छा गई है। यह किसी एक घटना का दुख नहीं, बल्कि आत्मा का एक स्थायी एहसास है।

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