दिल न पहुँचा गोशा-ए-दामाँ तलक
क़तरा-ए-ख़ूँ था मिज़ा पर जम रहा
“My heart did not reach the folds of your lap, A drop of blood was freezing on my temperament.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरा दिल आपके आँचल के कोने तक नहीं पहुँचा, और मेरे मिज़ाज पर खून की एक बूँद जम रही थी।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरे दर्द को बयां करता है। शायर कहते हैं कि दिल उस नज़दीकी जगह तक नहीं पहुँच पाया, और मिज़े पर खून की बस एक बूँद भी जम रही थी। यह सिर्फ शारीरिक चोट नहीं है, बल्कि भावनाओं का ठहराव है। यह उस बेचैनी को दिखाता है जब आप किसी चीज़ को छूने के बेहद करीब होते हैं, लेकिन आख़िरी पल में वो हाथ से फिसल जाती है। यह इश्क़ की उस कशमकश का बयान है, जहाँ चाहत और हक़ीक़त के बीच बस एक पतली सी लकीर है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
