सुनते हैं लैला के ख़ेमे को सियाह
उस में मजनूँ का मगर मातम रहा
“We hear of Laila's tent, which is dark and somber, But within it, only Majnun's mourning remains.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हम लैला के तम्बू को श्याम सुनते हैं, मगर उसमें मजनूँ का मातम है।
विस्तार
यह शेर बाहरी ग़म और अंदरूनी ग़म के बीच का फ़र्क़ बताता है। शायर कहते हैं कि भले ही लैला का ख़ेमा उदासी से डूबा हो, लेकिन उस उदासी के भीतर... जो सबसे गहरा मातम है, वह तो मजनूँ का अपना इंतज़ार और ग़म है। यह बताता है कि इंसान का सबसे बड़ा दर्द, अक्सर सबसे ज़्यादा दिखाई देने वाले गम से कहीं ज़्यादा गहरा होता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
