जवाब-नामा सियाही का अपनी है वो ज़ुल्फ़ किसू ने हश्र को हम से अगर सवाल किया

“The curtain of blackness, the tresses are hers alone, If the world itself should question us, what will be known?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

जवाब-नामा सियाही का अपनी है वो ज़ुल्फ़, किसू ने हश्र को हम से अगर सवाल किया। इसका शाब्दिक अर्थ है कि स्याही के जवाब-नाम (जवाब-नामा) की वो ज़ुल्फ़ (लहराती काली घटा) उसकी अपनी है, और अगर किसी ने क़यामत (हश्र) के दिन हमसे सवाल किया, तो क्या पता चलेगा।

विस्तार

यह शेर एक तरह का खुला ऐलान है, अपनी पहचान और अपनी आज़ादी का। शायर कहते हैं कि ये ज़ुल्फ़ें, ये स्याही का जवाब-नामा, मेरी अपनी कहानी है। वो तो हद ही कर देते हैं! वो तो हश्र के दिन से भी चुनौती देते हैं। जैसे कह रहे हों कि मेरी ज़िंदगी का हिसाब कौन लगाएगा? कोई नहीं! सिर्फ मैं ही अपनी कहानी का मालिक हूँ।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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