मिरी अब आँखें नहीं खुलतीं ज़ोफ़ से हमदम न कह कि नींद में है तू ये क्या ख़याल किया

“My eyes no longer open from the intoxication of you, my beloved; do not say that you are merely in a dream—what notions have you formed?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेरे अब आँखें नहीं खुलतीं ज़ोफ़ से हमदम, न कह कि नींद में है तू ये क्या ख़याल किया। इसका अर्थ है कि मेरे अब आँखें तुम्हारी मदहोशी से नहीं खुलतीं, प्रिय; तुम यह मत कहो कि मैं सिर्फ़ सपने में हूँ—तुमने क्या विचार किए हैं।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की उस गहराई को बयां करता है, जहाँ रूह का सुकून भी जागृत रहता है। शायर कह रहे हैं कि उनकी आँखें अब खुलती ही नहीं हैं, क्योंकि वे अपने महबूब के नज़दीक इतने खोए हुए हैं। वह महबूब से कहते हैं कि ये नींद नहीं है, यह तो एक ऐसी जागी हुई मुहब्बत है जो उन्हें कभी सोने नहीं देगी।

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