गुल यादगार-ए-चेहरा-ए-ख़ूबाँ है बे-ख़बर
मुर्ग़-ए-चमन निशाँ है कसू ख़ुश-ज़बान का
“The remembrance of your face is a fragrant flower, unknowing, And the rooster in the garden is the sign of a sweet-tongued man.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तुम्हारा चेहरा एक सुगंधित फूल है जो अनजान है, और बाग में लगा मुर्गा एक मधुरभाषी व्यक्ति का संकेत है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही सूक्ष्म तुलना करता है। शायर मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि महबूब के चेहरे की याद एक बेखबर, खुशबूदार फूल है, जो स्वयं अपने असर से अनजान है। उसी तरह, बगीचे में लगा मुर्गा किसी मीठी ज़बान वाले इंसान की पहचान है। मीर यहाँ महबूब की याद को एक प्राकृतिक, सुंदर लेकिन अप्रत्याशित चीज़ बताकर, किसी की बातों की सादगी और स्पष्टता को दर्शाते हैं।
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