कोई बुझती है ये भड़क में अबस — मीर तक़ी मीर

कोई बुझती है ये भड़क में अबस तिश्नगी पर इ'ताब करता हूँ

“This burning passion is fading now, I am suffering from thirst (of love).”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

इस भड़कती आग में यह प्यास बेकार ही बढ़ रही है और यह बुझती नहीं। मैं अपनी प्यास को उसकी इस व्यर्थ ज़िद के लिए फटकार रहा हूँ।

विस्तार

यह शेर एक आशिक़ के दिल की गहरी उलझन को बयान करता है। शायर पूछते हैं कि क्या यह जो जुनून है, यह बुझ रहा है... क्या यह आग शांत हो रही है? लेकिन तुरंत ही वे कहते हैं कि मैं इस प्यास को सह रहा हूँ। यह समर्पण और तड़प के बीच की जंग है, एक ऐसी तड़प जो हार मानने को तैयार नहीं है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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