सर तलक आब-ए-तेग़ में हूँ ग़र्क़ — मीर तक़ी मीर

सर तलक आब-ए-तेग़ में हूँ ग़र्क़ अब तईं आब आब करता हूँ

“I am drowned in the water of the sword up to my neck; now I merely make the water of water.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं तलवार की धार की चमक में सिर तक डूबा हुआ हूँ। इस डूबने के बावजूद, मैं अब भी पानी-पानी पुकार रहा हूँ, जो प्रेम की कभी न मिटने वाली प्यास को दर्शाता है।

विस्तार

यह शेर इंसान की अपनी उलझनों और भावनाओं के चक्र को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि वो पहले से ही 'तलवार के पानी' (संघर्ष) में डूबे हुए हैं, लेकिन अब वो खुद ही उस पानी को हिला रहे हैं। इसका मतलब है कि जब हम किसी बड़ी परेशानी में होते हैं, तो अक्सर हम अपनी ही बेचैनी से उस परेशानी को और बढ़ा देते हैं। यह आत्म-विनाश की एक गहरी भावना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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