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टुक तो रह ऐ बिना-ए-हस्ती तू
तुझ को कैसा ख़राब करता हूँ

Oh, you who are merely a fragment of existence, How can I keep ruining you?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ऐ वजूद की बुनियाद, ज़रा ठहर तो सही, देख मैं तुझे किस तरह बर्बाद और ख़राब करता हूँ।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के उस गहरे विरोधाभास को दर्शाता है। शायर कह रहे हैं, 'ऐ वजूद के बिना-ए-हस्ती, तू बस यूँ ही रह।' वे अपनी अनुपस्थिति या महबूब की कमी से बात कर रहे हैं। दूसरी लाइन, 'तुझ को कैसा ख़राब करता हूँ' का मतलब है कि शायद उनसे प्यार करने का अपना तरीका ही महबूब की सादगी को बिगाड़ रहा है। यह एक विनती है कि महबूब जैसा है, वैसा ही बना रहे!

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