आम हुक्म-ए-शराब करता हूँ — मीर तक़ी मीर

आम हुक्म-ए-शराब करता हूँ मोहतसिब को कबाब करता हूँ

“I issue the command for wine, And the Muhtasib (market monitor) for kebabs.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं शराब को आम करने का हुक्म देता हूँ और उस मोहतसिब यानी नैतिकता के रखवाले को कबाब की तरह भून देता हूँ।

विस्तार

यह शेर न सिर्फ़ शराब के मज़ाक में है, बल्कि यह एक तरह की खुली चुनौती भी है। शायर कह रहे हैं कि मैं न केवल शराब का हुक्म देता हूँ, बल्कि मैं उस मोहतसिब (नैतिक प्रहरी) को भी अपनी मर्जी से तंग करता हूँ। कबाब बनाना यहाँ सिर्फ़ शारीरिक क्रिया नहीं है, यह उस हँसी और बेपरवाही को दिखाता है जो नियमों की परवाह नहीं करती। यह आज़ादी का एक शानदार इज़हार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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