पढ़ें दुरूद न क्यूँ देख कर हसीनों को ख़याल-ए-सनअत-ए-साने है पाक-बीनों को

“Why should they not send blessings upon beholding the fair? The pure of sight perceive the Maker's craft reflected there.”

— मीर अनीस
अर्थ

पवित्र दृष्टि रखने वाले हसीनों को देखकर भला दुरूद (दुआ) क्यों न पढ़ें, क्योंकि उन्हें तो उनमें ईश्वर (सृष्टिकर्ता) की कारीगरी का ध्यान आता है।

विस्तार

शायर यहाँ हुस्न और ख़ूबसूरती को देखने का एक बेहद पाकीज़ा और रूहानी नज़रिया पेश कर रहे हैं। जिनकी नज़र साफ़ और दिल पाक होता है, वो किसी हसीन चेहरे को महज़ दुनियावी नज़र से नहीं देखते, बल्कि उन्हें उसमें ख़ुदा की बेमिसाल कारीगरी झलकती दिखाई देती है। इसीलिए किसी सुंदर रचना को देखकर उनके लबों से अनायास ही दुआ और दुरूद निकल पड़ता है, क्योंकि वो असल में उस कलाकार की तारीफ़ कर रहे होते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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