ख़बर नहीं उन्हें क्या बंदोबस्त-ए-पुख़्ता की जो ग़स्ब करने लगे ग़ैर की ज़मीनों को

“Have they no inkling of that firm, unyielding reckoning, those who set about usurping the lands of another?”

— मीर अनीस
अर्थ

क्या उन लोगों को उस पक्के इंतज़ाम या हिसाब की कोई ख़बर नहीं है, जो दूसरों की ज़मीनों पर नाजायज़ कब्ज़ा करने लगे हैं?

विस्तार

इस शेर में शायर ज़मीन की पैमाइश और बंदोबस्त के बहाने इंसान के लालच पर एक गहरी चोट करते हैं। जो लोग दूसरों के हक़ और ज़मीनों पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा कर लेते हैं, वे शायद कुदरत के उस अटल और पुख़्ता इंसाफ़ से बिल्कुल बेख़बर हैं। यह शेर हमें याद दिलाता है कि दुनियावी ताक़त चाहे कुछ भी छीन ले, आख़िरकार ज़िंदगी और मौत का असली हिसाब-किताब बेहद मज़बूत और तयशुदा होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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