“How could one ever trace those travelers to oblivion? They departed in such a way, leaving no footprints behind.”
अदम (मृत्यु की दुनिया) की ओर जाने वाले मुसाफ़िरों का सुराग़ आख़िर कैसे मिले? वे इस तरह रुख़सत हुए कि अपने पीछे पैरों का कोई निशान तक नहीं छोड़ा।
यह शेर मौत की खामोशी और उसके रहस्य को बहुत मार्मिक अंदाज़ में बयां करता है। शायर उन लोगों की बात कर रहा है जो इस दुनिया को छोड़कर हमेशा के लिए 'अदम' यानी शून्यता की ओर चले गए हैं। वे इस क़दर बेनिशान होकर रुख़्सत हुए हैं कि पीछे अपने कदमों के निशान तक नहीं छोड़े, मानो इस दुनिया से जाने वालों का कोई सुराग कभी किसी को मिल ही नहीं सकता।
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