तप-ए-दरूँ ग़म-ए-फ़ुर्क़त वरम-ए-पयादा-रवी मरज़ तो इतने हैं और कुछ दवा नहीं रखते

“An inward fever, the grief of parting, feet swollen from wandering so far—afflictions are indeed so many, yet I keep no remedy at all.”

— मीर अनीस
अर्थ

अंदरूनी बुखार, जुदाई का ग़म और पैदल चलने की वजह से आई सूजन; बीमारियाँ तो इतनी सारी हैं, मगर मेरे पास कोई दवा नहीं है।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने दिल और जिस्म दोनों पर इश्क़ के असर का हाल बयान कर रहा है—अंदर सुलगता हुआ तपता बुखार, जुदाई का गहरा रंज और दर-ब-दर भटकने से सूजे हुए पैर। बीमारियों की इतनी लंबी फेहरिस्त गिनाने के बाद वह बड़ी मासूमियत से कहता है कि मर्ज़ तो बहुत हैं, मगर इलाज के नाम पर कोई दवा पास नहीं। यहाँ आशिक़ ने अपने दर्द को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है, क्योंकि वह जानता है कि इस मर्ज़ का सच्चा इलाज सिर्फ़ महबूब का दीदार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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