ભર્યા છે જ્ઞાનધન ભાથાં, ઝુકાવે શાહ પણ માથાં, જગતનો ગમ સદા ખાતાં, ગમીને જ્યાં રજા દેવી. ૯

“Their quivers brim with knowledge, a treasure vast,Before them, even kings their proud heads cast.The world's deep sorrows, they forever taste,From where, with peace, one must depart at last.”

— कलाપી
अर्थ

जिनके तरकश ज्ञान-धन से भरे हैं, उनके समक्ष बादशाह भी सिर झुकाते हैं। संसार के दुखों को सदा सहते हुए, संतुष्टि के साथ ही यहाँ से विदा लेनी चाहिए।

विस्तार

यह दोहा ज्ञान की असीमित शक्ति को दर्शाता है। यह कहता है कि जो व्यक्ति ज्ञान के धन से परिपूर्ण होते हैं, उन्हें इतना सम्मान मिलता है कि राजा भी उनके सामने सिर झुकाते हैं। ऐसे लोग संसार के दुख और सच्चाइयों को गहराई से समझते हैं और जीवन के सभी पहलुओं को स्वीकार करते हैं। अंततः, ऐसा व्यक्ति, जिसने समझ और अनुभव से भरा जीवन जिया है, इस दुनिया से शांति और संतोष के साथ विदा लेता है। यह ज्ञान से भरे जीवन जीने, चुनौतियों का सामना गरिमा के साथ करने और अंत को शांतिपूर्ण ढंग से स्वीकार करने के बारे में है।

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