“Joy brought calamity in its train, igniting pyres with its own hand,Upon the grief of others, where punishment is gladly received.”
खुशी खुद अपने साथ आफत लाई, अपने हाथों से विनाश की आग जलाई। यह उस स्थिति का वर्णन करता है जहाँ व्यक्ति दूसरों के दुख से संबंधित होने पर खुशी-खुशी सजा स्वीकार करता है।
यह दोहा हमारे कर्मों के गहरे परिणामों पर प्रकाश डालता है। यह बताता है कि खुशी की तलाश कभी-कभी अनजाने में मुसीबत ला सकती है, या हम खुद ही समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। विशेष रूप से, यह दूसरों के दुख में खुशी ढूंढने के खिलाफ चेतावनी देता है। यह दोहा दर्शाता है कि यदि हमारी खुशी दूसरों के दर्द की कीमत पर आती है, या यदि हम दूसरों को नुकसान पहुँचाते हैं, तो हमें खुशी-खुशी उसके परिणामस्वरूप मिलने वाली सजा या परिणामों को स्वीकार करने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह जिम्मेदारी और कर्म के चक्र की एक मार्मिक याद दिलाता है, हमें इस बात का ध्यान रखने के लिए प्रेरित करता है कि हमारी खुशी की तलाश दूसरों को कैसे प्रभावित करती है, और परिणामों को स्वीकार्यता के साथ सामना करें।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
