ये है मय-कदा यहाँ रिंद हैं यहाँ सब का साक़ी इमाम है — जिगर मुरादाबादी
“This is the tavern, home to revelers, where the cupbearer leads as the priest; This is no holy shrine, O Sheikh, here piety itself is strictly forbidden.”
अर्थ
यह मयख़ाना है जहाँ शराबी रहते हैं और सबका इमाम साक़ी है; हे शैख़ जी, यह कोई पवित्र हरम नहीं है, यहाँ परहेज़गारी और पाकीज़गी हराम है।
विस्तार
इस शेर में शायर मयकदे और हरम यानी पवित्र स्थल के फ़र्क़ को बड़ी बेबाकी और ख़ूबसूरती से पेश कर रहे हैं। यहाँ मयकदा सिर्फ़ शराब पीने की जगह नहीं, बल्कि रूहानी आज़ादी और सच्ची मोहब्बत की महफ़िल है, जहाँ साक़ी ही सबका रहनुमा या इमाम है। शैख़ जी को छेड़ते हुए शायर कहते हैं कि अपने दिखावे और पाखंड को बाहर ही छोड़ आइए, क्योंकि इश्क़ के इस दरगाह में बनावटी परहेज़गारी सबसे बड़ा गुनाह मानी जाती है।
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