मेरा कमाल-ए-शेर बस इतना है ऐ 'जिगर' — जिगर मुरादाबादी
“The triumph of my verse, O Jigar, is simply this: they held sway over me, and I held sway over the world.”
अर्थ
ऐ जिगर, मेरी शायरी का कमाल बस इतना ही है कि महबूब मुझ पर छा गया और मैं पूरी दुनिया पर छा गया।
विस्तार
जिगर मुरादाबादी यहाँ बड़ी सादगी से अपने पूरे शायराना कमाल का श्रेय अपने महबूब के इश्क़ को दे देते हैं। उनका कहना है कि शायरी में उनका अपना कोई हुनर नहीं, बस महबूब की याद और अहसास उन पर इस कदर हावी हुए कि वही जज़्बात अल्फ़ाज़ बनकर दुनिया के दिलों पर छा गए। प्यार में खुद को पूरी तरह हार जाना ही यहाँ शायर की सबसे बड़ी जीत बन जाता है।
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