मैं वो साफ़ ही न कह दूँ जो है फ़र्क़ मुझ में तुझ में — जिगर मुरादाबादी
“Shall I not speak plainly of what sets you and me apart? Yours is the ache of solitary grief, mine the sorrow of the entire world.”
अर्थ
क्या मैं साफ़-साफ़ बता न दूँ कि मुझमें और तुझमें क्या फ़र्क़ है? तुम्हारा दर्द सिर्फ़ तुम्हारी तन्हाई का दुख है, जबकि मेरा ग़म सारी दुनिया का ग़म है।
विस्तार
इस शेर में शायर बहुत बेबाकी से निजी दर्द और दुनिया भर के ग़म के बीच का अंतर समझा रहे हैं। सामने वाला इंसान सिर्फ़ अपनी तन्हाई और जाती तकलीफ़ में घिरा हुआ है, जबकि शायर का दिल पूरी इंसानियत के दर्द से धड़क रहा है। यह शेर हमें अहसास दिलाता है कि जब इंसान अपनी ज़ात से बाहर निकलकर पूरे ज़माने के दुखों को महसूस करने लगता है, तो उसका ग़म कहीं ज़्यादा गहरा और बावक़ार हो जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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