तिरे दिल के टूटने पर है किसी को नाज़ क्या क्या — जिगर मुरादाबादी

तिरे दिल के टूटने पर है किसी को नाज़ क्या क्या तुझे ऐ 'जिगर' मुबारक ये शिकस्त-ए-फ़ातेहाना

“How deeply proud is someone at the shattering of your heart; / Felicitations, O Jigar, upon this triumphant defeat!”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

तुम्हारे दिल के टूटने पर किसी को कितना नाज़ और घमंड है। हे जिगर, तुम्हें अपनी यह शानदार और विजयी जैसी हार बहुत मुबारक हो।

विस्तार

इस शेर में जिगर इश्क़ के एक बेहद ख़ूबसूरत विरोधाभास को बयां कर रहे हैं, जहाँ दिल का हारना भी सबसे बड़ी जीत बन जाता है। जब आपका दिल टूटता है और महबूब अपनी इस जीत पर इतराता या नाज़ करता है, तो आशिक़ के लिए वह शिकस्त भी एक अनमोल तोहफ़ा बन जाती है। इसीलिए शायर ख़ुद को इस 'शानदार हार' की मुबारकबाद दे रहे हैं, क्योंकि महबूब के हाथों हार जाना ही मोहब्बत की सबसे सच्ची कामयाबी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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