तिरी दूरी ओ हुज़ूरी का ये है अजीब आलम — जिगर मुरादाबादी

तिरी दूरी ओ हुज़ूरी का ये है अजीब आलम अभी ज़िंदगी हक़ीक़त अभी ज़िंदगी फ़साना

“Such a strange realm is this, of your absence and your presence: one moment life is reality, the next a fleeting fable.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

तुम्हारी दूरी और मौजूदगी की यह अजीब हालत है कि एक पल ज़िंदगी हक़ीक़त लगती है और अगले ही पल एक फ़साना।

विस्तार

यह शे'र मोहब्बत की उस खूबसूरत कशमकश को दिखाता है, जहाँ महबूब का होना और न होना ज़िंदगी के मायने ही बदल देता है। जब महबूब पास होता है, तो ज़िंदगी ठोस, सच्ची और मुकम्मल हक़ीक़त लगती है; मगर जुदाई होते ही वही दुनिया एक ख़्वाब या अफ़साने जैसी लगने लगती है। शायर ने कितने सहज अंदाज़ में कह दिया कि किसी के साथ और दूरी के बीच इंसान का पूरा वजूद कैसे डोलता रहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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