तिरे इश्क़ की करामत ये अगर नहीं तो क्या है — जिगर मुरादाबादी

तिरे इश्क़ की करामत ये अगर नहीं तो क्या है कभी बे-अदब न गुज़रा मिरे पास से ज़माना

“If this is not the miracle of your love, then what else could it be? / Never has the world passed by me without reverence.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

अगर यह तुम्हारे इश्क़ का चमत्कार नहीं है तो और क्या है, कि यह ज़माना कभी मेरे पास से बेअदबी के साथ नहीं गुज़रा।

विस्तार

आमतौर पर दुनिया इश्क़ करने वालों को ताने देती है और रुसवा करती है, लेकिन यहाँ आशिक़ को ज़माने से सिर्फ़ इज़्ज़त और अदब मिला है। शायर इस अनोखी बात को अपनी कोई ख़ूबी नहीं, बल्कि अपने महबूब के इश्क़ की करामात यानी चमत्कार मानता है। उसकी मोहब्बत का दर्जा इतना पवित्र और ऊँचा है कि बेरहम दुनिया भी उसके सामने सिर झुकाए बिना नहीं गुज़र सकती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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