जब वो आए तो पेश-तर सब से — जिगर मुरादाबादी

जब वो आए तो पेश-तर सब से मेरी आँखों को इज़्न-ए-ख़्वाब हुआ

“When they arrived, before all else took place, / My eyes were granted leave to drift in dream.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

जब वे आए, तो सबसे पहले मेरी आँखों को सोने (ख़्वाब देखने) की इजाज़त मिल गई।

विस्तार

यह शेर इंतज़ार के दर्द और मुक़द्दर की विडंबना को बेहद ख़ूबसूरती से बयां करता है। शायर पूरी ज़िंदगी जिस महबूब की राह तकता रहा, जब वह आखिरकार सामने आया, तो आँखों को जागकर दीदार करने के बजाय सोने की इजाज़त मिल गई। इसमें दोहरे पहलू छिपे हैं—या तो बेइंतहा इंतज़ार के बाद आँखों को एक मुकम्मल सुकून नसीब हुआ, या फिर यह बदकिस्मती की वो इंतिहा है जहाँ हक़ीक़त की घड़ी में भी नसीब ने सिर्फ़ ख़्वाबों का सहारा बख़्शा।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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