तमाम हर्फ़-ओ-हिकायत तमाम दीदा-ओ-दिल — जिगर मुरादाबादी

तमाम हर्फ़-ओ-हिकायत तमाम दीदा-ओ-दिल इस एहतिमाम पे भी शरह-ए-आशिक़ी न हुई

“With every word and legend, with all of sight and heart; yet even with such grand design, love could not be explained.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

तमाम शब्दों, कहानियों और दिल-ओ-नज़र की सारी गहराइयों को झोंक देने के बावजूद, इतने बड़े इंतज़ाम के बाद भी इश्क़ की सही व्याख्या न हो सकी।

विस्तार

यह शेर मोहब्बत के उस तिलिस्म को छूता है जिसे लफ़्ज़ों के दायरे में नहीं बांधा जा सकता। शायर कहते हैं कि हमने दुनिया भर की कहानियाँ, सारे शब्द, देखने वाली आँखें और महसूस करने वाला दिल—सब कुछ दांव पर लगा दिया, मगर इस तमाम तैयारी के बावजूद इश्क़ की मुकम्मल दास्तान बयां न हो सकी। असल में, मोहब्बत कोई ऐसा फलसफ़ा नहीं जो समझाई जा सके; यह तो बस रूह से महसूस की जाने वाली एक कैफ़ियत है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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