फ़सुर्दा-ख़ातिरी-ए-इश्क़ ऐ मआज़-अल्लाह — जिगर मुरादाबादी
“Heaven forbid, this bleak desolation of love! Even the thought of the beloved brought no bloom.”
अर्थ
ईश्वर रक्षा करे, प्रेम की मायूसी इस हद तक बढ़ गई है कि महबूब के ख़याल से भी दिल में कोई ताज़गी या ख़ुशी पैदा नहीं हुई।
विस्तार
इश्क़ में आम तौर पर महबूब का ख़याल ही दिल के मुरझाए हुए चमन को खिलाने के लिए काफ़ी होता है। मगर यहाँ आशिक़ के दिल पर ऐसी गहरी उदासी और बेदिली छाई है कि महबूब की मीठी याद भी उसमें कोई ताज़गी या मुस्कान नहीं जगा पाई। यह दिल के उस भयानक सूनेपन की दास्तान है जहाँ आख़िरी सहारा भी बेअसर हो गया है और इंसान ख़ुदा से पनाह माँग उठता है।
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