मिरे ख़याल से भी आह मुझ को बोद रहा — जिगर मुरादाबादी
“Alas, even from my very thought a distance did remain; I tried a thousand ways, yet parity was never attained.”
अर्थ
अफ़सोस कि मेरे ख़याल और मेरे बीच भी एक दूरी बनी रही; मैंने हज़ारों तरह से कोशिश की, लेकिन बराबरी कभी हासिल न हो सकी।
विस्तार
इस शेर में शायर अपनी बेबसी और नाकामी का बड़ा ही दर्दनाक मंज़र पेश कर रहे हैं। इंसान सोचता है कि कम से कम अपनी कल्पना और ख़यालों में तो वह महबूब के करीब पहुँच ही सकता है, मगर अफ़सोस कि ख़याल की उड़ान भी उस दूरी को पाट न सकी। शायर ने हज़ार जतन किए कि किसी तरह यह फ़ासला मिटे और बराबरी का रिश्ता बन पाए, लेकिन वह अनछुई दूरी हमेशा क़ायम रही।
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