अपने जी में ज़रा तो कर इंसाफ़ — जिगर मुरादाबादी

अपने जी में ज़रा तो कर इंसाफ़ कब से ना-मेहरबान है प्यारे

“Look into your own heart and do a little justice — for how long now have you been unkind, my love?”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

हे प्यारे, ज़रा अपने दिल में इंसाफ़ करके देख कि तू कब से मुझ पर ना-मेहरबान बना हुआ है।

विस्तार

यहाँ आशिक़ कोई कड़वा गिला नहीं कर रहा, बल्कि बड़े लाड़ और दर्द के साथ महबूब के अपने दिल को ही गवाह बना रहा है। वह कहता है कि किसी तीसरे के सामने नहीं, ज़रा अपने ही भीतर झांक कर सच-सच इंसाफ़ कर कि तू कब से इतना बेरुख़ा बना बैठा है। इस शेर की ख़ूबसूरती उस सीधे और मासूम अपनेपन में है, जहाँ शिकवे में भी तल्ख़ी नहीं बल्कि एक गहरी पुकार और मोहब्बत की नरमी झलकती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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