तू जहाँ नाज़ से क़दम रख दे — जिगर मुरादाबादी

तू जहाँ नाज़ से क़दम रख दे वो ज़मीन आसमान है प्यारे

“Wherever you tread with graceful pride, that very earth becomes the heavens, my beloved.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

हे प्यारे, तू जहाँ भी नाज़ और अदा से क़दम रख देता है, वह ज़मीन आसमान की तरह बुलन्द और मुक़द्दस बन जाती है।

विस्तार

इस शेर में महबूब के हुस्न और उसकी मौजूदगी की ख़ासियत को बहुत ख़ूबसूरती से बयां किया गया है। शायर कहता है कि महबूब जब नाज़ और नज़ाकत से ज़मीन पर अपने क़दम रखता है, तो वह मामूली ख़ाक भी आसमान की तरह बुलंद और पाकीज़ा हो जाती है। यह महबूब के प्रति असीम अक़ीदत और मोहब्बत का इज़हार है, जहाँ उसका एक क़दम भी दुनिया की हर चीज़ को जन्नत बना देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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