“Oh, the miraculous eloquence of the beloved's gaze—each one is left believing they alone were addressed!”
प्रियतम की आँखों की अभिव्यक्ति का क्या चमत्कार है कि हर किसी को यही भ्रम होता है कि वे केवल उसी से मुख़ातिब थे।
इस शेर में महबूब की निगाहों के अनोखे जादू का बेहद ख़ूबसूरत बयान है। भरी महफ़िल में महबूब ने बस एक नज़र डाली, और उनकी आँखों का अंदाज़ ऐसा करामाती था कि वहाँ मौजूद हर शख़्स इसी ख़ुशफ़हमी में जी रहा है कि वो ख़ास इशारा सिर्फ़ उसी के लिए था। यह आँखों की वो ख़ामोश गुफ़्तगू है, जो बिना एक लफ़्ज़ कहे भी हर दिल को यह एहसास दिला देती है कि वही सबसे ख़ास है।
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