रोक सकती हो तो बढ़ कर रोक ले मंज़िल मुझे हर तरफ़ से आज आती है सदा-ए-दिल मुझे

“Let the destination step forward and halt me if it can, for today from every direction echoes the calling of my heart.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

अगर मंज़िल मुझे रोक सकती है तो आगे बढ़कर रोक ले, क्योंकि आज मुझे हर तरफ़ से अपने दिल की आवाज़ सुनाई दे रही है।

विस्तार

इस शेर में शायर का हौसला और दिल की आवाज़ पर उसका अटूट भरोसा बड़ी खूबसूरती से झलकता है। आमतौर पर मुसाफ़िर मंज़िल की तलाश में निकलते हैं, लेकिन यहाँ शायर को हर तरफ़ से अपने ही दिल की पुकार सुनाई दे रही है और वह मंज़िल को खुलेआम चुनौती दे रहा है कि हिम्मत हो तो मुझे रोक ले। यह उस दीवानगी और आज़ादी का अहसास है जहाँ इंसान के लिए मंज़िल पर पहुँचना नहीं, बल्कि दिल के बताए रास्ते पर बेखौफ़ चलना सबसे बड़ा मक़सद बन जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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