अब किधर जाऊँ बता ऐ जज़्बा-ए-कामिल मुझे हर तरफ़ से आज आती है सदा-ए-दिल मुझे

“Where should I turn now, tell me, O consummate passion? From every direction today, echoes the voice of my heart.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

हे परिपूर्ण प्रेम/जज़्बे, अब मुझे बता कि मैं किस दिशा में जाऊँ, क्योंकि आज मुझे हर तरफ़ से अपने ही दिल की पुकार सुनाई दे रही है।

विस्तार

यहाँ शायर अपनी बेपनाह मोहब्बत (जज़्बा-ए-कामिल) से एक प्यारा सा सवाल कर रहे हैं कि अब वह किस राह पर चलें। दिल की कैफियत ऐसी हो गई है कि वह जिस दिशा में भी देखते हैं, उन्हें अपने ही दिल की पुकार गूँजती हुई सुनाई देती है। यह शेर उस मदहोश कर देने वाले आलम को खूबसूरती से बयां करता है जहाँ इश्क़ सिर्फ सीने में कैद नहीं रहता, बल्कि पूरी कायनात में समा जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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