कैसा क़तरा कैसा दरिया किस का तूफ़ाँ किस की मौज तू जो चाहे तो डुबो दे ख़ुश्की-ए-साहिल मुझे

“What of a drop, what of a river, whose tempest, whose rising wave? / If You so will, even the dry shore can drown me.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

बूँद, नदी, तूफ़ान या लहरों की क्या बिसात है? यदि तेरी मर्ज़ी हो, तो किनारे की सूखी ज़मीन भी मुझे डुबो सकती है।

विस्तार

इस शेर में शायर महबूब या ख़ुदा की असीम कुदरत के आगे अपनी मुकम्मल बेबसी और समर्पण को बयां कर रहा है। दुनिया समझती है कि इंसान को तबाह करने के लिए दरिया, तूफ़ान या मौजों की ज़रूरत होती है, मगर शायर के लिए ये सब बेमानी हैं। असल ताकत सिर्फ तेरी रज़ा में है—अगर तू चाहे, तो सबसे महफ़ूज़ माना जाने वाला सूखा किनारा भी मुझे डुबो सकता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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