ख़ून-ए-दिल रग रग में जम कर रह गया इस वहम से बढ़ के सीने से न लिपटा ले मिरा क़ातिल मुझे

“The heart's blood froze in every vein, arrested by this dread: / Lest, stepping forward, my murderer clasp me to their chest instead.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मेरे दिल का ख़ून हर रग में इस डर और वहम से जम कर रह गया कि कहीं मेरा क़ातिल आगे बढ़कर मुझे अपने सीने से न लगा ले।

विस्तार

यहाँ शायर इश्क़ के एक बेहद ख़ूबसूरत और हैरान करने वाले विरोधाभास को बयां कर रहे हैं। आशिक़ अपने 'क़ातिल' यानी महबूब के सामने खड़ा है, मगर उसे वार किए जाने का डर नहीं है; उसका ख़ून तो इस ख़याल से जम गया है कि कहीं महबूब आगे बढ़कर उसे गले न लगा ले। ज़ुल्म सहने के आदी दिल के लिए महबूब का अचानक टूटकर गले लगाना उस खंजर से भी ज़्यादा जानलेवा और चौंकाने वाला साबित होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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