“My duty is merely to tend the garden of this world; what care I whether spring arrives or autumn passes by?”
मेरा काम तो केवल इस दुनिया के बाग़ की देखभाल करना और उसे संवारना है, मुझे कोई परवाह नहीं कि बहार आए या पतझड़ बीत जाए।
इस शेर में शायर एक ऐसे समर्पित माली की तरह बात करता है, जिसका काम सिर्फ़ दुनिया के चमन को संवारना और उसे महकाना है। उसे इस बात से कोई सरोकार नहीं कि क़िस्मत में बहार की ख़ुशहाली लिखी है या ख़िज़ाँ की वीरानी। यह शेर गीता के निष्काम कर्म जैसा गहरा पैग़ाम देता है—कि अपनी नीयत और मेहनत से दुनिया को ख़ूबसूरत बनाते रहो, बाक़ी अंजाम चाहे कुछ भी हो।
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