हर-सू दिखाई देते हैं वो जल्वा-गर मुझे क्या क्या फ़रेब देती है मेरी नज़र मुझे

“In every direction, that radiant presence appears to me; ah, what endless illusions my own eyes weave for me!”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मुझे हर दिशा में वही दिखाई देते हैं, मेरी अपनी नज़र मुझे कितने धोखे दे रही है।

विस्तार

इस शेर में इश्क़ की उस दीवानगी का बयान है जहाँ दिल इस क़दर महबूब के ख़याल में डूबा रहता है कि नज़र जहाँ भी जाए, वही जलवागर नज़र आता है। शायर अपनी ही आँखों के इस प्यारे से धोखे पर हैरान भी है और बेबस भी, क्योंकि वह जानता है कि यह महबूब की मौजूदगी नहीं बल्कि उसकी अपनी बेपनाह तलब का फ़रेब है। यह अहसास दर्द और ख़ूबसूरती का ऐसा नाज़ुक संगम है जहाँ इंसान सच्चाई जानते हुए भी इस मीठे वहम से बाहर नहीं आना चाहता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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