मरना है उन के पाँव पे रख कर सर-ए-नियाज़ करना है आज क़िस्सा-ए-ग़म मुख़्तसर मुझे

“Laying my head in humble submission at their feet, I must die; today, I must bring this tale of sorrow to an end.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मुझे अपने महबूब के कदमों में झुककर अपनी जान देनी है और आज अपने ग़म की इस दास्तान को ख़त्म करना है।

विस्तार

यहाँ आशिक़ अपनी तड़प और जुदाई के अंतहीन दर्द से इस क़दर थक चुका है कि वह महबूब के क़दमों में पूरी तरह समर्पित होकर अपनी जान देना चाहता है। 'सर-ए-नियाज़' यानी अपनी आजिज़ी भरा सिर उनके पाँव पर रख देना मुकम्मल सुपुर्दगी की निशानी है। इस तरह महबूब के दर पर दम तोड़कर वह अपनी ज़िंदगी के लंबे और दर्दनाक 'क़िस्सा-ए-ग़म' को हमेशा के लिए ख़त्म कर देना चाहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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