“Someone surely felt compassion for this restless heart; granted it was not you, yet someone just like you it was.”
इस बेकरार दिल का दर्द समझने वाला कोई तो ज़रूर था; माना कि वह तुम नहीं थे, लेकिन कोई बिल्कुल तुम्हारे जैसा ही था।
यह शेर तड़पते हुए दिल के उस नाज़ुक और तसल्ली-भरे एहसास को बयां करता है, जहाँ महबूब की कमी किसी और में ढूंढी जाती है। शायर कहता है कि माना मेरे बेचैन दिल का दर्द बांटने वाले असल में तुम नहीं थे, लेकिन उनका अंदाज़ और हमदर्दी बिल्कुल तुम्हारे जैसी थी। यह उस गहरे इश्क़ की दास्तान है, जहाँ इंसान अपने प्यार को खोकर भी हर हमदर्द चेहरे में उसी की परछाईं तलाशता रहता है।
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