वो थे न मुझ से दूर न मैं उन से दूर था आता न था नज़र तो नज़र का क़ुसूर था

“Neither were they far from me, nor far from them was I; if they remained unseen, the fault belonged to my own eye.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

न तो वे मुझसे दूर थे और न मैं उनसे दूर था; अगर वे दिखाई नहीं दे रहे थे तो यह मेरी अपनी ही नज़र की ख़ामी थी।

विस्तार

यह शेर एक बेहद ख़ूबसूरत और गहरी समझ को बयां करता है कि महबूब—चाहे वह ईश्वर हो या कोई अज़ीज़—हमसे कभी दूर था ही नहीं। दूरी का यह एहसास दरअसल हमारी अपनी सीमित दृष्टि और समझ की कमी का नतीजा था। यह शेर हमें आत्ममंथन की उस मंज़िल पर ले जाता है जहाँ यह अहसास होता है कि जिसे हम दर-ब-दर तलाश रहे थे, वह तो हमेशा हमारे पास था, बस हमारी ही नज़र पर पर्दा पड़ा हुआ था।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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