आज क्या बात है कि फूलों का रंग तेरी हँसी से मिलता है

“What wonder stirs today, that the blossom's hue / So deeply resembles the radiance of your smile?”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

आज ऐसी क्या बात है कि फूलों का रंग तुम्हारी हँसी से मिलता-जुलता लग रहा है।

विस्तार

इस शेर में शायर महबूब की मुस्कुराहट की तुलना खिले हुए फूलों के रंगों से कर रहा है। वह बड़े प्यार और नज़ाकत से हैरान होकर पूछता है कि आज कुदरत में ऐसा क्या जादू है कि बगिया के फूल ठीक उसकी हँसी जैसे खिले-खिले लग रहे हैं। आमतौर पर लोग खूबसूरती की मिसाल फूलों से देते हैं, मगर यहाँ तो ऐसा लगता है जैसे फूलों ने अपना सारा रंग-रूप और ताज़गी ही महबूब की मुस्कान से उधार ली हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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