“I forget every cruelty dealt by her hand, with such sheer innocence does she meet me.”
मैं उसके सारे ज़ुल्म और सितम भूल जाता हूँ, क्योंकि वह मुझसे इतनी मासूमियत और सादगी के साथ मिलता है।
यह शेर मोहब्बत की उस प्यारी लाचारी को बयां करता है जहाँ सारे शिकवे महबूब की एक झलक के आगे बेअसर हो जाते हैं। माशूक ने चाहे कितने भी सितम ढाए हों, मगर जब वह बेहद मासूमियत और सादगी से सामने आता है, तो पुराने सारे दर्द पल भर में धुल जाते हैं। दिल की यही तो खूबसूरती और कमजोरी है कि अपनों के भोलेपन पर इंसान सारे ज़ख़्म भूलकर एक बार फिर उन पर निसार हो जाता है।
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