सिलसिला फ़ित्ना-ए-क़यामत का तेरी ख़ुश-क़ामती से मिलता है

“The rising tumult of the Judgment Day / Finds its thread in your tall, graceful sway.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

क़यामत का फ़ितना और हंगामा तुम्हारे सुंदर और आकर्षक क़द-ओ-क़ामत से जुड़ा हुआ मालूम होता है।

विस्तार

इस शेर में शायर महबूब के लंबे, दिलकश और सीधे-सच्चे क़द की तारीफ़ बहुत ही नफ़ासत से कर रहा है। उर्दू शायरी में महबूब के उठ खड़े होने को अक्सर क़यामत की हलचल से जोड़ा जाता है—यानी जब तुम उठते हो, तो दिलों में तूफ़ान मच जाता है। शायर मुस्कुराते हुए कह रहा है कि क़यामत का जो भी हंगामा है, उसका सीधा ताल्लुक़ तुम्हारे ख़ूबसूरत क़द से ही है। यह हुस्न की उस मदहोश करने वाली ताक़त का बयान है, जो देखते ही देखते सामने वाले की दुनिया पलट देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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